time table : भारतीय रेलों के लिए जीरो बेस्ड टाइम टेबल पर विचार

time table

बीकानेर। लाॅक डाउन खत्म होनेे के बाद भारतीय रेल का संचालन भी बदला-बदला होगा। हर साल की तरह इस साल नया टाइम टेबल(time table) जुलाइ में जारी नहीं होगा। हालांकि ट्रेनों का समय बदलेगा, लेकिन कब से और कौनसी ट्रेन का, इसपर काम किया जा रहा है। संक्रमण से सुरक्षित रेल का संचालन कैसे हो, इसके लिए भारतीय रेल ने 21 विषय तय किए है। इन अलग-अलग विषयों की विवेचना के लिए रेलवे बोर्ड के प्राइम ऑफिसर्स की ड्यूटी लगाई गई है। लाॅक डाउन के दौरान ये प्राइम ऑफिसर्स गहन अध्ययन, मंथन, विवेचना में लगे हैं। निष्कर्षस्वरूप भारतीय रेल अब जीरो बेस्ड समय सारिणी (zero based time table) पर चलने की तैयारी में है। जीरो बेस्ड समय सारिणी (zero based time table) के लिए नई दिल्ली-हावड़ा, नई दिल्ली-चेन्नई, नई दिल्ली- मुंबई, हावड़ा- मुंबई और चेन्नई-हावड़ा सेक्शन का चयन किय गया है। इसमें भी भारतीय रेल के सबसे व्यस्त नई दिल्ली-हावड़ा खण्ड को वरीयता दी गई है। इस रूट पर क्षमता से अधिक पैसेंजर ट्रेनों और मालगाड़ियों का काफी समय से संचालन हो रहा है। इस रूट समेत अनेक व्यस्त रूटों पर रेल के सुचारू संचालन और ट्रेनेां की स्पीड बढ़ाने पर काम चल रहा है। पूरे देश में रेल संचालन बंद है। गत 25 मार्च से सभी यात्री गाड़ियों का परिचालन रोक दिया गया। इस दौरान भारतीय रेल के मैंटीनैंस का काम चलता रहा। सभी खण्डों पर स्पीड बढ़ाने के लिए जरूरी काम किए गए। इस बीच रेलवे बोर्ड ने भी अफसरों को दिशा निर्देश देते हुए अपनी रिपोर्ट देने को कहा है। बोर्ड उसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति बनाएगा। बताया जा रहा है कि लॉक डाउन खत्म होने के बाद ट्रेनों की गति बढ़ाने के लिए रेल प्रशासन काफी ट्रेनों की समय सारिणी (time table)भी बदलने जा रहा है।

क्या है जीरो बेस्ड टाइम टेबल ( time table)

रेलवे ट्रेनों के संचालन के लिए टाइम टेबल बनाता है। इस टाइम टेबल में सम्बंधित सेक्शन में ट्रेनों के स्टेशनों पर स्टाॅपेज समय, काॅशन समय और कनेक्शन या क्रासिंग समय को भी समाहित किया जाता है। लम्बी दूरी की ट्रेनों को अपने पूरे सफर के लिए लगभग 10 से 15 क्रासिंग का सामना करना पड़ता है। दोहरी लाइन पर क्राॅसिंग की जगह ओवरटेक टाइम समाहित किया जाता है। अर्थात रेलवे यह मानकर चलता है कि ट्रेन को सामने से आने वाली ट्रेनों से क्रासिंग का सामना करना पड़ेगा, इसलिए एक क्रासिंग के लिए 10 से 15 मिनट का समय परिचालन समय में रखा जाता है। जीरो बेस्ड टाइम टेबल में इन क्रासिंग समय को हटाकर वास्तविक समय पर ट्रेन चलाई जाती है। रेलवे कुछ खण्डों में चलने वाली प्रमुख ट्रेनों के क्रासिंग टाइम हटाकर टाइम बचाना चाहता है।