railway workshop : सौ साल पुरानी सड़क बंद करेगा रेलवे

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-श्याम मारू-
बीकानेर। रेलवे वर्कशाॅप (railway workshop) के सामने से गुजरने वाली लगभग सौ साल से भी पुरानी सडक को रेलवे इसे बंद करने की तैयारी कर रहा है। इस सडक का सौ साल से भी ज्यादा समय से इस्तेमाल किया जा रहा है। तत्कालीन बीकानेर की ओर से आम लोगों के साथ-साथ रेल कर्मचारियों के लिए भी छोड़े गए इस रास्ते का उपयोग आज भी है। दरअसल लालगढ़ रेलवे वर्कशॉप (railway workshop) से मुक्ता प्रसाद और रामपुरा बस्ती की तरफ जाने वाली सडक को रेलवे की तरफ से बंद किया जा रहा है। रेलवे इसे अपनी जमीन बताकर आम और रेलकर्मचारियों के लिए रास्ता बंद कर रहा है। हालांकि इस बारे में रेलवे की तरफ से कोई भी आधिकारिक पत्र जारी नहीं किया गया है लेकिन पिछले दिनों रेलवे वर्कशॉप (railway workshop) में कार्य संचालन के लिए तीन नई पटरियां बिछाई गई है। इन पटरियों को बिछाने के बाद अभी तक रेलवे ने क्षतिग्रस्त सडक को दुरुस्त नहीं करवाया है। शहर के जागरूक नागरिकों व सामाजिक संस्थाओं ने रेलवे के उच्चाधिकारियों से जब मुलाकात की और क्षतिग्रस्त सडक की मरम्मत करवाने का आग्रह किया तो अधिकारियों ने पहले तो इस पर काफी बेरूखी दिखाई, लेकिन बाद में स्पष्ट रूप से मौखिक कह दिया कि इस सडक को बंद किया जा रहा है, यह आम रास्ता नहीं है।

railway workshop स्थापना 1926 में हुई थी, सड़क उससे पुरानी

लालगढ़ स्थित रेलवे वर्कशॉप की स्थापना वर्ष 1926 में हुई थी। इस वर्कशॉप की स्थापना में तत्कालीन रियासत के महाराजा गंगासिंह का खासा योगदान था। उन्होंने पूरे वर्कशॉप के लिए जमीन की व्यवस्था की और इस वर्कशॉप तक आने-जाने वाले रेल कर्मचारियों के लिए रास्ते का भी। वर्कशॉप के पास ही लोको शैड था। किसी जमाने में लोको शैड और वर्कशॉप के कर्मचारियों और आसपास बसी बस्तियों व रेलवे कॉलोनियों के निवासियों के आने-जाने के लिए यही एक रास्ता था। रेलवे वर्कशॉप की १९२६ में स्थापना से पहले इस जमीन का सर्वे किया गया था। तब यहां आने-जाने वाले रेलवे अधिकारियों और रियासत के मंत्रियों के लिए इस रास्ते का ही इस्तेमाल किया जाता था। इसके अलावा तत्कालीन समय में कोटगेट से पूगल रोड स्थित बजरंग धोरे की तरफ जाने के लिए यह कच्चा मार्ग था।

ये इलाके होंगे प्रभावित

लालगढ़ रेलवे वर्कशॉप के मुख्य द्वार पर बनी सडक बंद करने से बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन प्रभावित होगा। इस सडक का इस्तेमाल सबसे ज्यादा रेल कर्मचारी ही कर रहे हैं। रेलवे वर्कशॉप और लोको शैड के संचालन के लिए रेलवे प्रशासन ने भारी संख्या में रेल कर्मचारियों को नियुक्ति दी थी। फिर उनके रहने के लिए कॉलोनियां बसाई। लोको शैड में काम करने वालों को पुरानी रेलवे कॉलोनी में रहने को क्वार्टर दिए गए। इसी प्रकार रेलवे वर्कशॉप में पदस्थापित कर्मचारियों के लिए मण्डल रेलवे अस्पताल के पीछे नई रेलवे कॉलोनी की स्थापना की गई। इन दोनों कॉलोनियों में क्वार्टर कम पड़े तो पुरानी रेलवे कॉलोनी के पीछ रामपुरा बस्ती की तरफ कुछ नए क्वार्टर बनाए गए। इन सभी कॉलोनियों में रहने वाले लोग कोटगेट, केईएम रोड की तरफ आने-जाने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही मुक्ता प्रसाद नगर,आरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर,रामपुरा मार्केट रामपुरा बस्ती, भीमनगर,प्रेमनगर व ख्वाजा कॉलोनी के लोग भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। बरसों से लोग इसी रास्ते से आना-जाना करने के कारण अभ्यस्त हो गए हैं। यदि यह रास्ता बंद कर दिया जाएगा तो इस इलाके में रहने वाले लगभग डेढ़ से दो लाख लोगों को काफी परेशानी होगी।

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