Railway-2 : भारतीय जीवन का प्रतिबिंब है रेलवे

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बीकानेर रेलवे (Railway-2) स्टेशन पर हुए इस हादसे के बाद पिताजी को तीन साल तक दिल्ली के सेन्ट्रल रेलवे अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। उसके बाद भी करीब एक साल तक लालगढ़ रेलवे अस्पताल में इलाज करवाना पड़ा। इसके बाद उनका मेडिकल हुआ और उन्हें लोको शैड लालगढ़ में वाटरमैन के पद पर लगा दिया। प्याउ पर पानी पिलाने का काम। वे बड़े ही मनोयोग से रेलकर्मियों की सेवा करते। अपनी जेब से खर्च कर मटकियां खरीदते, केवड़ा और इलायची लाते थे। गर्मियों की छुट्टियों में पिताजी हमें लोको शैड ले जाते और पूरे शैड के अलग-अलग विभागों में पानी की केतली देकर भेजते और हम मौके पर ही कर्मचारियों को पानी पिलाने का काम करते। लंच के समय तो जैसे रेलकर्मचारी हमारा इंतजार करते और भोजन के दौरान मौके पर शीतल पानी मिलने पर खूब आशीर्वाद देते थे। इस दौरान मैंने रेलवे को काफी नजदीक से देखा। मैं कभी इंजन पर चढ़ जाता। कभी कोयला बाॅक्स में। कभी घूमचक्कर टर्न टेबल जिस पर इंजन को रखकर दिशा बदली जाती थी, पर धीमी गति से घूमते इंजन को देखता रहता। लोको शैड में कोयले से भरी मालगाड़ियां और उसे करीने से खाली करते मजूदर…वाकई वे रोमांचक पल मेरे बाल मन पर अमिट अंकित हो गए। रेलवे (Railway-2) से दूसरा जुड़ाव रहा मेरा पत्रकारिता का कार्यकाल। राजस्थान पत्रिका बीकानेर में कार्य करने के दौरान मुंझे रेलवे की बीट सौंपी गई थी। हालांकि उस जमाने में यानि वर्ष 2004 के समय रेलवे के ज्यादा समाचार नहीं होते थे। लेकिन मैंने रेलवे को बचपन में जैसे जिया था, उसी शिद्दत के साथ जुट गया। पत्रकारिता के दौरान मुझे रेलवे (Railway-2) के बारे में काफी सीखने को मिला। यही कारक रहे जिसने मुझे रेलवे पर पुस्तक लिखने की प्रेरणा दी। मेरा मानना है कि रेलवे भारतीय जीवन का प्रतिबिंब है। जनरल बोगी से लेकर वातानुकूलित प्रथम श्रेणी तक भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। जनरल बोगी में निर्धनतम और प्रथम श्रेणी वातानुकूलित श्रेणी में सम्पन्नतम व्यक्ति सफर करता हुआ श्रेणीवार भारतीय वर्ग दर्शाता है। रेलगाड़ी में बंगाली, असमिया, राजस्थानी बिहारी से लेकर हर प्रांत का व्यक्ति मिनी भारत का ही अहसास करवाता है।

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