question : भारतवासियों का एक ही सवाल, कब शुरू होगी रेल

-रेलवे ने बनाया कोविड-19 आपातकालीन प्रकोष्ठ
-400 अधिकारी-कर्मचारी प्रकोष्ठ में र्तैनात
-हर दिन पूछे जा रहे 13000 सवाल (question)
-रेलवे दे रहा हर भाषा में जवाब
बीकानेर।
रेलगाड़ियों का संचालन पुनः कब शुरू होगा…टिकट रद्द होने पर रिफण्ड कैसे मिलेगा…ट्रेन पुनः चलने पर किन सावधानियों का ध्यान रखना होग? ये कुछ ऐसे सवाल (question) है जो आम जनमानस के जेहन में है। रेलवे ने इन सवालों के जवाब देने के लिए एक अलग से ‘कोविड-19 आपातकालीन प्रकोष्ठ’ गठित कर रखा है। प्रतिदिन 13000 सवालों के जवाब इस प्रकोष्ठ के माध्यम से दिए जा रहे हैं, पिछले चार सप्ताह में लगभग 4 लाख जिज्ञासाएं शांत की जा चुकी है। सबसे ज्यादा बार पूछे जाने वाला सवाल (question) हैः- यात्री रेलगाड़ियां कब चलेंगी। भारतीय रेल ने यात्रियों और सभी वाणिज्यिक ग्राहकों के हितों का ध्यान रखने और राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला निर्बाध चलते रहना सुनिश्चित करने के लिए हर संभव उपाय किए हैं। कोविड-19 महमारी के फैलाव को रोकने के लिए लॉकडाउन के दौरान उसने अपनी यात्री सेवाएं पूरी तरह बंद करदी हैं लेकिन इसके बावजूद आम जनता से रेलवे का नाता नहीं टूटा है और वह आपूर्ति सेवाओं के माध्यम से जन जन से जुड़ी हुई है। लॉकडाउन के दौरान यह महसूस किया जाने लगा था कि रेलवे के पास ऐसी कोई व्यवस्था होनी चाहिए जिससे वह लोगों की शिकायतें और सुझाव सुन सके और उन पर तेजी से प्रतिक्रिया दे सके। इसे ध्यान में रखते हुए ही अलग से एक कोविड-19आपातकालीन प्रकोष्ठ बनाया गया ।

प्रकोष्ठ में है 400 अधिकारी-कर्मचारी

रेलवे का यह आपातकालीन प्रकोष्ठ एक राष्ट्रीय स्तर की इकाई हैजिसमें रेलवे बोर्ड से लेकर उसके डिवीजनों तक के लगभग 400 अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। लॉकडाउन के दौरान, यह प्रकोष्ठ पांच संचार और प्रतिक्रिया प्लेटफार्मों – हेल्पलाइन नंबर 139 और 138, सोशल मीडिया (विशेष रूप से ट्विटर), ईमेल (तंपसउंकंक/तइ.तंपसदमज.हवअ.पद)और सीपीग्राम के माध्यम से लगभग 13,000 प्रश्नों, अनुरोधों और सुझावों का प्रतिदिन जवाब दे रहा है। इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक प्रश्नों का सीधे तौर पर टेलीफोन पर जवाब दिया गया वो भी कॉल करने वाले व्यक्ति की स्थानीय भाषा में। रात दिन 24 घंटे काम करने वाले इस प्रकोष्ठ के माध्यम से भारतीय रेल जनमानस की समस्याओं को समझने के लिए जमीनी स्तर पर जुड़ी हुई है।

139 पर 2.30 लाख, 138 पर 1.10 लाख काॅल

रेल मदद हेल्पलाइन 139 पर लॉकडाउन के पहले चार हफ्तों में टेलीफोन पर सीधे संवाद के जरिए 2,30,000 से अधिक प्रश्नों के उत्तर दिए गए। हेल्पलाइन नंबर 138 और 139 पर रेल सेवाओं के शुरू होने और टिकट वापसी के नियमों की जानकारी दी गई। लॉकडाउन की इसी अवधि के दौरान, हेल्पलाइन नंबर 138 पर 1,10,000 से अधिक कॉल आईं, जो कि जियो-फेन्सड है यानी यदि ऐसी कोई भी कॉल रेलवे डिवीजनल कंट्रोल ऑफिस में आती है तो (रेलवे कर्मियों द्वारा चैबीसों घंटे चलने वाली हेल्पलाइन सेवा के जरिए ऐसी कॉल का जवाब कॉल करने वाले व्यक्ति की भाषा में ही दिया जाता है) कंट्रोल रूम में ऐसे अधिकारियों की तैनाती की गई है जो स्थानीय भाषाओं से भलिभांति वाकिफ होते हैं। इस व्यवस्था से रेलवे के ग्राहकों के लिए सूचनाओं के प्रवाह को गति मिलती है।