pandit : गंगा मैया में अस्थियों के विसर्जन की परम्परा

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रेलवे 14: मंदिर में दर्शन के बाद हम हरिद्वार दर्शन पर निकल गए। अन्नक्षेत्र में कई धन्नासेठ भिखारियों, गरीबों, जोगियों और साधुओं के लिए अन्नदान कर रहे थे। अन्नक्षेत्र में कई दुकानदार पका हुआ भोजन बनाकर तैयार रखते हैं। दानदाताओं को जितने लोगों को भोजन करवाना हो, उपलब्ध करवा देते हैं। एक रुपए में चार चपाती, सब्जी और सूजी का हलुआ। अब 11 लोगों को भोजन करवाना हो तो 11 रुपए, 21 या 51 लोगों के लिए 21-51 रुपए से भुगतान कर दो। भोजन ग्रहण करने वाले भिखारियों की भी वे ही व्यवस्था कर देते हैं। हर की पौड़ी क्षेत्र में ही स्थित दुकानों के सामने ही भिखारियों-गरीबों को पंक्तिबद्ध बैठा देते हैं। आप अपने हाथ से उन्हें भोजन परोस सकते हो। अन्नक्षेत्र में ही गंगामैया मंदिर के पास ही पंडों-ब्राह्मणों की गद्दियां-गुमटियां स्थित हैं। हर जाति का पंडा। ये पंडे (pandit) अस्थियां विसर्जन करवाने या पिंडदान करवाने का कर्मकाण्ड करते हैं। इन पंडों (pandit) की एक खासियत है कि किसी भी दूसरी जाति के लोगों को भ्रमित नहीं करते, केवल अपने हिस्से की जातियों के यजमान का ही कर्मकाण्ड करते हैं। हरिद्वार में प्रवेश करते ही पंडे जाति और गोत्र पूछते हैं। जाति-गोत्र बताते ही वे आपको सम्बंधित पंडे (pandit)के पास भेज देंगे। सनातन धर्म में मान्यता है कि मृत परिजनों की अस्थियां गंगा नदी में प्रवाहित करने से उन्हें सद्गति मिलती है। ये रीति सदियों से चली आ रही है। सबसे पहले किसने शुरुआत की, पता नहीं। गंगा नदी के पास सभ्यताएं विकसित होने के साथ ही हरिद्वार, प्रयागराज, पाटलीपुत्र, काशी, कुरूक्षेत्र समेत अनेक तीर्थों पर कर्मकाण्ड सम्पन्न करवाने की जानकारी हैं। अस्थियों के विसर्जन के साथ-साथ ये पंडे (pandit) वंशावली बही संधारण का काम भी करते हैं। आप से पहले आपके रिश्तेदार कब-कब आए थे, उनके साथ कौन व कितने लोग थे, किसकी अस्थियों लाए थे। आपको अपने दादा या परदादा या उनसे पहले के वंश की जानकारी लेनी हो तो वे दस या उससे भी ज्यादा पीढ़ियों की नाम सहित जानकारी दे देंगे। ये सब उस वंशावली बही में उल्लेखित है। यजमान की खातिरदारी करना, इनकी परम्परा है। चाय-नाश्ता तो अनिवार्य है, यजमानों को भोजन की मनुहार भी करेंगे। यदि आपके पास पैसे खत्म हो गए, जेब कट गई या कुछ अनहोनी हो गई तो, कर्मकाण्ड तो वे करवाएंगे ही, आपको आने का भाड़ा व भोजन आदि के लिए नकद राशि भी दे देंगे। हां, इसका उल्लेख वे उस बही में करना नहीं भूलते। आपके रिश्तेदारों में से भविष्य में जो भी आएगा उससे या तो वे या उनके वंशज यह राशि प्राप्त कर सकेंगे। हरिद्वार आने वाले पर्यटकों में 80 से 85 प्रतिशत लोग अस्थियां विसर्जन के लिए ही आते हैं। क्रमशः

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