freight corridor : राजस्थान के कॉलेज ने सशर्त जमीन छोड़ी

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पुल का नाम दयानन्द सेतु रखने की शर्त
-राजेन्द्र एस-
(Bureau Chief)

नई दिल्ली। रेलवे के वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (freight corridor) की राह में रोड़ा बना हुआ तीन साल का विवाद अंततः सुलझ गया है। राजस्थान के एक कॉलेज ने ऊपर पुल का नाम दयानंद सरस्वती के नाम पर रखने की शर्त रखी। काॅलेज ने बदले में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ दायर याचिका वापस लाने पर सहमति जताई है। रेलवे को ओवरब्रिज तक पहुंचने के लिए एक सड़क (अप्रोच रोड) बनानी है। इसके संबंध में 400 मीटर लंबा रास्ता चाहिए था। यह अप्रोच रोड इस महत्त्वकांक्षी फ्रेट कॉरिडोर freight corridor के डिजाइन के लिए आवश्यक है। यह खबर रेलवे के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। रेलवे की फाटक रहित डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर freight corridor बनाने की यह योजना अधर में थी। यह योजना जमीन के इस छोटे से हिस्से की वजह से अमल में नहीं आ पा रही थी।

freight corridor जोड़ेगा दिल्ली को मुम्बई से

अजमेर के दयानंद कॉलेज (डीएवी) ने ऊपरी पुल का नाम दयानंद सेतु रखने की शर्त से राज्य के अधिकारियों को पिछले महीने अवगत करा दिया था। पत्र में कहा गया, रेलवे ऊपरी पुल का नाम मशहूर हस्ती महर्षि दयानंद के स्मरण एवं सम्मान में दयानंद सेतु रखा जाए। साथ ही इसमें कहा गया, कॉलेज उपर्युक्त शर्तें पूरी होने पर मामले में लंबित याचिका को वापस लेने का भी वचन देता है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब देश भर में भूमि अधिग्रहण के मुद्दे लटके हुए हैं। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन व पूर्वोत्तर राज्यों को जोडने की परियोजना में बाधा आ रही है। कोलकाता में पूर्वी-पश्चिमी मेट्रो के साथ ही अन्य फ्रेट कॉरिडोरों समेत रेलवे की बड़ी परियोजनाओं को प्रभावित कर रहे हैं। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेड कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) दिल्ली को आर्थिक राजधानी मुंबई के साथ जोड़ेगा । इसका कार्य 2021 तक पूरा होना है। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस ऊपरी पुल का निर्माण डब्ल्यूडीएफसी के तहत राज्य अधिकारी करेंगे।

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