dharamshala: केसर मिश्री-मक्खन मिश्रित लस्सी का लाजवाब स्वाद

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रेलवे 17
दीपदान
का अलौकिक दृश्य मन पर अंकित हो गया। रात हो चली थी। हम सभी धर्मशाला आ गए। बाई ने पीम्पें में से स्टोव निकाला और उसमें केरोसिन भरा। पिताजी हरिद्वार में केरोसिन कब और कहां से लाए थे, मुझे पता ही नहीं चला। मां खाना बनाने में व्यस्त हो गई। मैं और भाई धर्मशाला (dharamshala) के गलियारों में चहलकदमी करने निकल गए। रात के समय सभी यात्री विश्राम कर रहे थे। कुछ कमरों में खाना पकाने का उपक्रम चल रहा था। आते समय केतली में पानी भर लाए। खाने के बाद मैं और भाई कुछ देर सांप-सीढ़ी खेलने के बाद सो गए। तड़के साढ़े चार बजे बादलों की गड़गड़ाहट से आंख खुल गई। बाहर बहुत तेज बारिश हो रही थी। मुंह अंधेरे सबउ ठ गए। तभी बिजली चली गई। अंधेरे में कड़कड़ाती बिजली की कौंध डरावनी लग रही थी। धर्मशाला (dharamshala) में छतों की परनाळों से पानी बह रहा था। लगभग एक घंटा तक पानी बरसता रहा। पौ फटने लगी थी। नीचे सड़क पर लोगो की आवाजाही शुरू हो गई थी। स्नानादि के बाद सुबह 8 बजे तक हम सब बाहर थे। आज कनखल गए। खुले मैदान में बहती गंगा अत्यंत सुहावनी लग रही थी। कनखल के मंदिरों में ज्यादा भीड़ नहीं थी। वहां के मंदिरों में दर्शन के बाद तांगे में बैठ हम वापस हरिद्वार आ गए। दोपहर के समय गर्मी तेज होने लगी थी। धूप तपने लगी थी। अचानक उमस बढ़ गई और हम पसीने के मारे बेहाल थे। ठण्डा कुआ के पास मथुरावालों की प्राचीन दुकान की लस्सी काफी प्रसिद्ध है। पन्द्रह पैसे का एक या आठ आने के चार सिकोरे। बिलौने का मक्खन भर के मिश्री व केसर मिश्रित लस्सी से भरा सिकोरा जब होठ से लगाया तो एक ही सबड़के में एक-तिहाई लस्सी कंठ से नीचे उतर गई। लगा जैसे कलेजे में ठण्डक पड़ गई। केसर-मिश्री-मक्खन मिलाकर घंटों दही को मथने के बाद ही ऐसा लाजवाब स्वाद प्रकट हो पाता है। बीकानेर में ऐसी लस्सी का चलन नहीं था। धर्मशाला (dharamshala) में दोपहर का भोजन करने के बाद लगभग दो घंटे तक विश्राम किया। आज हमें ऋषिकेश के लिए प्रस्थान करना था। पिताजी और बाई ने सामान समेटा। बाई ने कमरे में झाड़ू लगाकर साफ किया। हम सब नीचे आ गए। पिताजी कार्यालय में जाकर हिसाब करने लगे। वहां से बाहर निकले तो एक तांगा सामने ही दिख गया। तांगें में बैठने का आनंद ही अलग है। हिचकोले खाते हुए तांगा आग बढ़ता गया। हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ थी। यहां देश के विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में ट्रेनें आती है। (क्रमशः)

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