train late : सोने को चटाई नहीं, तम्बू की फरमाइश

बात बुलेट ट्रेन की, मालगाड़ियों पर ध्यान नहीं
-सुखदेव एस-(Delhi Bureau)

नई दिल्ली। कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी(adhir ranjan chodhari) ने संसद में कहा कि मोदी सरकार के दौरान पिछले वर्षो में रेलगाड़ियों की समय की पाबंदी की स्थिति खराब हुई है, रेलगाड़ियां काफी लेट (train late) हो रही है। ट्रेन लेट (train late) होने के कारण काफी संख्या में ट्रेनें रद्द करने की घटनाएं सामने आई हैं, ट्रेनों की रफ्तार घटी है और सरकार कह रही है कि ये बेच दो, वो बेच दो। उन्होंने कहा, यह सरकार बुलेट ट्रेन की बात करती है लेकिन मालगडियों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार रेलवे में 50 लाख करोड़ रूपए के निवेश की बात कह रही है लेकिन यह पैसा कहां से आएगा, इसका कोई जिक्र नहीं है। यह तो वही बात हो गई कि सोने को चटाई नहीं और तम्बू की फरमाइश हो रही है। है। उन्होंने कहा कि रेलवे जब तक अपनी कमाई नहीं बढ़ाएगी तब तक रेलवे को चुस्त दुरूस्त नहीं किया जा सकेगा। ट्रेनों से माल ढुलाई की मात्रा में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। यहां तक मालगाड़ियां भी ट्रेन की तरह लेट (train late) चल रही लेकिन यह खेदजनक है कि सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण कोष डीआरएफ फंड के मद में इस बजट में कटौती की गई है। लोकसभा में कांग्रेस के नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछले वर्षो में फ्रांस, चीन और रूस की यात्रा के दौरान सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे लेकिन इस दिशा में प्रगति की कोई सूचना नहीं है।
रेलवे में मैला ढोने वालों की भर्ती देश के लिए शर्मनाक है: कनिमोझी
द्रमुक सदस्य कनिमोझी ने गुरूवार को लोकसभा में दावा किया कि रेलवे अब भी मैला ढोने वालों की भर्ती करता है जो देश के लिए शर्म की बात है। लोकसभा में वर्ष 2019..20 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कनिमोझी ने कहा, यह देश के शर्म की बात है कि रेलवे अब भी मैला ढोने वालों की भर्ती करता है। उन्होंने कहा कि यह भर्तियां अनुबंध के आधार पर की जाती हैं। कनिमोझी ने कहा कि इस सरकार को हर समस्या का समाधान निजीकरण में दिखता है और वह भारतीय रेल में यही करने जा रही है। उन्होंने कहा कहा कि उनकी पार्टी भारतीय रेल और दूसरे सार्वजनिक उपक्रमों में विनिवेश या निजीकरण का पुरजोर विरोध करती है। द्रमुक नेता ने कहा कि इस सरकार में योजनाओं का नाम हिंदी में होता है जिससे तमिलनाडु में लोगों को समझ नहीं आता। हमारी मांग है कि योजनाओं और रेलवे स्टेशनों के नाम क्षेत्रीय भाषाओं में भी होना चाहिए।