लाल-हरी झण्डी और डस्टर होंगे सिर्फ खादी के

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जयपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे जोन खादी से डस्टर बनाएगा। इसके लिए लभगक एक करोड़ 65 लाख रूपए का ठेका मिला है। रेलवे खादी (rail khadi) का अधिक से अधिक इस्तेमाल करेगा। अब रेलवे खादी (rail khadi) से ही डस्टर बनवाएगा, रेल कोच में खादी का इस्तेमाल करेगा। लाल और हरी झण्डियों के लिए भी खादी का ही इस्तेमाल किया जाएगा। हाल ही केवल लाल और हरी झण्डी के लिए तथा डस्टर के लिए उत्तर पश्चिम रेलवे और उत्तर रेलवे ने कुल 12 करोड़ 40 लाख रूपए के ठेके दिए। खादी कपड़ों के प्रमुख केन्द्र खादी भवन को कपूरथला स्थित रेल कोच फेक्ट्री में कोच निर्माण के लिए सवा करोड़ रूपए का ठेका दिया गया है। चालू महीने में ही खादी भवन को लगभग 3 करोड़ रूप्ए के आर्डर मिल चुके हैं।नई दिल्ली कनाट पैलेस स्थित खादी एवं ग्रामोद्योग (केवीआईसी) पूरे देश भर में खादी का प्रमुख बिक्री केन्द्र है। सबसे ज्यादा यहीं से खादी की आपूर्ति की जाती । आयोग के मुखिया विनय कुमार सक्सेना का कहना है कि रेलवे खादी के एक्सक्लूसिव इस्तेमाल की योजना बना रहा है।

आय और अवसर बढ़ेंगे

ऐसे सरकार एवं सरकारी मंत्रालयों से इस तरह के ठेके मिलने से सिर्फ खादी केन्द्र की ही आय नहीं बढ़ती बल्कि कर्मकारों एवं दस्तकारों की आय भी बढ़ेगी। बल्कि खादी के इस्तेमाल से देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे नए उद्यमियों को बेहर अवसर मिलेंगेऔर इससे खादी क्षेत्र से जुड़ने के लिए नए लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी। सक्सेना का कहना है कि रेलवे से हाल ही मिले नए ठेकों से निश्चित तौर पर रोजगार के अधिक अवसर और अधिक दिवस सृजित होंगे। इससे जुड़े कारीगरों एवं दस्तकारों की आय बढ़ेगी। यह खादी के लिए अच्छा संकेत है। इसे बाद आयोग अब अन्य मंत्रालयों एवं सरकारी कम्पनियों से भी समन्वय स्थापित कर नया रास्ता तैयार करेगा। उल्लेखनीय है कि इस साल रेलवे ने पर्यावरणीय अनूकूल खादी उत्पादों को खरीदने में फिर से दिलचस्पी दिखाई है।

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